कम उम्र में बाल सफेद होने के कारण एवं इनके उपचार


कम उम्र में बाल सफेद होने के कारण एवं इनके उपचार

नमस्कार, मैं टिकेश्वर वर्मा आप सभी महोदय को अपना Heath Care Lifestyle में स्वागत करता हु।
आजकल बालों का सफेट होना आम बात हो गयी है। बालो का सफेट होना बढ़ती उम्र की निरंतरता को दोहराता है। सामान्य तौर पर देखा गया है की 30 साल के उम्र से बालों के सफेद होने के लक्षण दिखाई देने लगते है, पहले बालो का रंग स्लेटी में परिवर्तन होता है और कुछ हफ़्तों में यह रंग सफेद दिखाई देने लगते है। कम उम्र में सफ़ेद बाल पर अलग-अलग लोगों की प्रतिक्रिया भी अलग-अलग है. कई लोग कम उम्र में सफ़ेद बाल को स्वीकार नहीं करते. उसे छुपाने की कोशिश करते हैं. कई लोग इसे फ़ैशन स्टेटमेंट या फिर स्टाइल स्टेटमेंट में बदल देते हैं.
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               यह परिवर्तन बढ़ती उम्र की निशानियों को स्पस्ट करता है किन्तु आजकल छोटे छोटे उम्र के बालको में बाल का सफेद होना सामान्य बात हो गया है  अक्सर लोगो को देखा गया है कि तोड़े से बाल का सफेद होने पर हेयर डाई करने लगते है जो थोड़े वक़्त के लिए ये असर ज़रूर दिखाता हैं, लेकिन जैसे ही आप इनका इस्तेमाल बंद करते हैं वो बाल वापस सफ़ेद होने लगते हैं. इस समस्या को देखते हुए आज हमने आपके सामने कम उम्र में छोटे बच्चों का बाल सफेद होने के कारण उपचार और कुछ घरेलू नुस्खों को बताकर आपकी समस्या का समाधान करने का प्रयास करेंगे।

आइए जाने की छोटे उम्र के बच्चों में इस परेसानी का कारण क्या हो सकता है-

1)आनुवंशिकता
कम उम्र में बच्चों का बाल सफेद होना इनके सबसे अधिक ओर मुख्य कारण कहा जाय तो यह आनुवांशिकता से ही स्थानांतरित होता है। विभिन्न वैज्ञानिक शोधों से पता चला है कि जिनके माता-पिता का बचपन मे बालो के सफेद होने के लक्षण दिखाई दिए उन्ही लक्षणों का अनुवांशिकता के आधार पर बच्चों के बाल भी कम उम्र में सफेद होने की समस्या देखे गए। अनुवांशिकता निश्चित ही अपने गुण धर्म को विपरीत परिस्थितियों में दूसरो के ऊपर प्रभावित करता है जैसे माता-पिता का बौना, लम्बा होना, सिर का गंजापन होना, बालो का जल्दी सफेद होना, बॉडी इम्युनिटी का कम होना जैसे लक्षण बच्चों में अनुवांशिकता के आधार से ही आता है।

2) विभिन्न रासायन युक्त तेलों का उपयोग-
वर्तमान स्थिति को देखा जाय तो यहां हजारों प्रोडक्ट ऐसा है जो केमिकल युक्त होता है जिससे मानव स्वास्थ्य के साथ ही बालों का जल्दी झड़ना, सफेद होना, बॉडी में खुजली होना जैसे हानिकारक समस्या देखा जा रहा है। जिनमें कम उम्र में बालों का सफेद होना भी मुख्य कारण बन गया है। शोध से यह भी पता चला है कि केनाइटिस में हेयर कलर पिगमेंट पैदा करने वाले सेल में दिक्कत पैदा हो जाती है, जिसकी वजह से बाल सफ़ेद होने लगते हैं.

3) बॉडी में पोषक तत्वों की कमी-
छोटे बच्चों को विशेष खान-पान की जरूरत होती है जिनसे इनके बॉडी में पोषक तत्व बना रहे, किन्तु बच्चों के खाने-पीने पर विशेष ध्यान न देने से उनमें पोषक तत्वों की कमी हो सकती है। बालो में मेलेनिन नामक हार्मोन पाया जाता है जो बालों को चमकदार और ग्रो करने में सहायक होता है किंतु बच्चों में इन पोषक तत्वों की कमी से कम उम्र में बाल सफेद हो सकता हैं। बॉडी में कैल्शियम, विटामीन12बी, विटामिनD कॉपर आयरन, जिंक प्रोटीन आदि की कमी के कारण बाल कमजोर और सफेद होने की समस्या सबसे ज्यादा होती है।

4)हाइपोथायरायड की स्तर के कारण
शरीर में थायराइड हार्मोन के स्तर में कमी की समस्या से लोगों में समय से पहले बालों के सफेद होने की आशंका बढ़ जाती है।

5)मिनरल्स की कमी
आयरन और कॉपर जैसे मिनरल्स की कमी के कारण भी कम उम्र में ही बाल जल्दी सफेद हो जाते हैं।
6)तनाव
तनाव के वक्त बनने वाले हार्मोन जैसे एड्रेनालाईन, कोर्टिसोल मेलानोसाइट कोशिकाओं को प्रभावित करता है, परिणामस्वरूप बालों के रंग सफेद होना प्रारम्भ हो जाता हैं।

कम उम्र में बाल सफेद होने का इलाज-
कम आयु में बालों के सफेद हो जाने का कोई विशेष कारण स्प्ष्ट तो नहीं है। इसके इलाज को लेकर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि, कुछ उपचारों को इस समस्या से निजात पाने के लिए प्रयोग में लाया जा रहा है। जिससे इन समस्याओं से छुटकारा पाया जा सकता है।

आइए जानते हैं किन उपचारों के माध्यम से कम आयु में ही बालों के सफेद हो जाने की समस्या को दूर किया जा सकता है।

1)कम उम्र में बालों की सफेदी को छिपाने के लिए लोगों ने बालों को रंगना शुरू कर दिया है। बाजार में कई प्रकार के प्राकृतिक रंग जैसे हिना, मेहदी, केमिकल्स युक्त हेयर डाई, भृंगराज के माध्यम से बालों को रंगा जाता है।
2)एंटी एजिंग के लिए उपयोगी माने जाने वाले ग्रीन टी, सेलेनियम, कॉपर, और  मेलाटोनिन जैसे यौगिकों का उपयोग भी फायदेमंद है।
3)विटामिन बी की कमी और हाइपोथायरायडिज्म की स्थिति में विटामिन बी के टेबलेट और उचित आहार लेने से भी इस समस्या को दूर किया जा सकता है।

4)नारियल तेल में मेहंदी मिलाकर लगाने से फायदा होता है। नारियल तेल में जड़ों के अंदर तक जाने के गुण के कारण मेहंदी का भूरा रंग बालों की जड़ों में पहुंचाता है जिस कारण बाल पहले भूरे फिर काले होने लगते हैं।
5)कलौंजी के बीजों और जैतून के तेल का मिश्रण सफेद बालों में उपचार के लिए उपयोग किया जा रहा है। बाल काला होने के साथ ही अधिक मुलायम और चमकदार बनते हैं।
6)सरसों के तेल में जिंक, कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम और सेलेनियम पाए जाते हैं। ये सभी बालों को स्वस्थ बनाए रखते हैं।
इस प्रकार आपने कम उम्र में बालों के सफेद होने की समस्याओं एवं इनके कारणों के बारे में जाने। उपर्युक्त उपचारों को अपनाकर आप कम उम्र में बालों के सफेद होने के लक्षण को कम कर सकते है।
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